जब किसी वस्तु का निर्माण होता हैं तभी उसके विनाश की पर्किर्या प्रारम्भ हो जाती है। जहाँ निर्माण है वहा विनाश निश्चित है यह प्रकृति का अटूट नियम है। इन नियमो को कोई बदल नहीं सकता। प्रकृति ही निर्माण करती हे यही समय आने पर विनास करती है प्रकृति के अपने बनाये कुछ नियम हे। प्रकृति उन नियमो का पालन करती हे। हम सभी मनुष्य,जीव -जंतु,पक्षी,पेड़ -पौधे यहां तक की इस धरती पर जितने भी समुन्द्र,पहाड़,झीले और नदिया भी प्रकृति के बनाये नियमो पर चलते है। यह सभी प्रकृति के बनाये नियमो को कभी नहीं तोड़ते,पर हम मनुष्यो ने प्रकृति के सभी नियमो को तोडा है। उन नियमो में परिवर्तन लाने की कोशिस की हे जिसकी वजह से आज समस्त मानव जाति के साथ सम्पूर्ण जिव जगत पर विनाश का खतरा मंडरा रहा है। हम सभी मनुष्य ने प्रकृति के नियमो को बदलने की कोशिस की,प्रकृति ने हमे ही विनाश के मुख में डाल दिया। आज से पहले कई बार धरती पर महाप्रलय हुआ है और आगे भी होते रहेंगे। हर बार महाप्रलय का कारण मनुष्य ही बनता है मानव जाति की गलती सम्पूर्ण जिव जगत को उठानी पड़ती है।