इसलिए हर बार हमें यह ज्ञान नया लगता है। जैसे हजारों लोग एक पहाड़ की चोटी पर चढ़ते हैं, लेकिन इन सभी लोगों के रास्ते अलग-अलग होते हैं, लेकिन पहाड़ की चोटी एक ही है। सबके रास्ते अलग-अलग हैं, लेकिन ज्ञान का स्रोत एक ही है। हर इंसान एक ही ज्ञान के स्रोत से ज्ञान प्राप्त करता है, लेकिन हर व्यक्ति अपनी जिज्ञासा और महत्वाकांक्षा के अनुसार ज्ञान प्राप्त करता है। हर व्यक्ति की जिज्ञासा उस व्यक्ति के अतीत का परिणाम होती है क्योंकि व्यक्ति उसी चीज की खोज करता है जो उसके पास नहीं होती है। इसी तरह व्यक्ति उस ज्ञान को प्राप्त करना चाहता है जिसकी उसके पास कमी होती है। अगर किसी व्यक्ति के पास कोई वस्तु है और वह व्यक्ति उस वस्तु का उपयोग करके खुश है, तो दूसरा व्यक्ति भी उस वस्तु को पाना चाहता है और उसका आनंद लेना चाहता है। यह आनंद, यह खुशी है। आज धरती पर जितने भी ज्ञान मौजूद हैं, उसका कारण यही है कि जिन्होंने इस ज्ञान को प्राप्त किया, वे जिज्ञासु थे। जिज्ञासा एक ऐसी आग है जो कभी नहीं बुझती। इसे जितना दबाओगे, यह उतनी ही बढ़ती जाएगी। जितनी जिज्ञासा को संतुष्ट करोगे, यह उतनी ही फैलती जाएगी। जिज्ञासा निस्वार्थ और प्राणी जगत के कल्याण के लिए होनी चाहिए। जिज्ञासा अगर स्वार्थ के लिए हो तो वह मनुष्य को महान बनाती है। जिज्ञासा अगर स्वार्थ से भारी हो तो वह मनुष्य को कुछ समय के लिए सुख जरूर देती है लेकिन अंत में दुख के अलावा कुछ नहीं देती। व्यक्ति जितनी जिज्ञासु होता है उतनी ही तरक्की करता है। हर व्यक्ति को जिज्ञासु होना चाहिए क्योंकि जिज्ञासा ज्ञान के ताले की चाबी है। जिज्ञासा के बिना कोई भी व्यक्ति कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। जिज्ञासा व्यक्ति के मन में वह आग है जो उसे हमेशा प्रेरित करती रहती है। ज्ञान प्राप्त करने की जिज्ञासा व्यक्ति के व्यक्तित्व को महान बनाती है। व्यक्ति तभी तक जिंदा रहता है जब तक वह अपनी जिज्ञासा से सीखता है। जिस दिन आपने सीखना बंद कर दिया उस दिन समझ लीजिए आप मर गए क्योंकि मुर्दे कभी जिज्ञासु नहीं होते। सोच और जिज्ञासा में थोड़ा सा अंतर होता है।
