जीवन और मृत्यु में श्रेष्ठता को लेकर जो प्रश्न है उसका जवाब देना इतना सरल नहीं है। जब हम दोनों पक्षों को देखेंगे और समझेंगे कि किन का पलड़ा भारी है, लेकिन किसी भी वस्तु का वजन करने के लिए एक माप की जरूरत होती है। एक पैमाने की जरूरत होती है। हम कैसे जीवन और मृत्यु को तोलेंगे कि दोनों में बेहतर कौन है?इसका क्या पैमाना हो सकता है? इस प्रश्न का जवाब जानने के लिए हमें मानव जीवन को ही एक पैमाना मानना होगा। वैसे तो मानव जीवन कोई पैमाना नहीं है। यह उस ईश्वर का वरदान है जिसने इस कायनात को बनाया मानव जीवन को हम एक पैमाने के रूप में देखकर ही हम इस प्रश्न का उत्तर देंगे कि हम जीवन और मृत्यु दोनों पक्षों को लेकर जीवन में उसके प्रभाव को या मानव जीवन पर उसके असर को देखेंगे और उस पर मानव के सुख और दुखों पर पड़ने वाले अंतर हमे इस प्रश्न का जवाब देने में हमारी मदद करेगा।
संदेश =हम चाहते हैं कि हमारे समाज को एक नई दशा मिले और आप सभी के प्रयास से हम एक ऐसे समाज बनाएंगे जिसमें सुख और शांति और समृद्धि को।
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